सुनील कुमार झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सुनील कुमार झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 20 मार्च 2014

चुनावी हायकू - सुनील कुमार झा


पाकलै खीर 
संटुआ क घर मे
ऐलै चुनाव ।

छी बुधियार 
तखनो नहि दैं छें 
अपन वोट ।

रामविलास 
पकड़ि‍ लेने छैक 
बीजेपी हाथ ।

सोझा टक्कर 
भाजपा राजद क 
अछि इ बेर ।

लड़त मीसा 
फेर जीतत लालू 
पाटलिपुत्र ।

भ गेल बागी 
राबड़ी सुपुत्री स 
रामकृपाल ।

रामकृपाल 
गेल बीजेपी संग 
खिलल फूल ।

रालोसपा भी 
नमोनिया मरीज 
मोदी लहर ।

दए क वोट
बनाउ सरकार
अपने लेल

अछि विकट
इ बेरक चुनाव
महाभारत

माय ‍बहिन
वोट दियो जरूर
इ चुनाव मे

बनब नेता
त करब विकास
यौ सांसद जी

जोड़ता हाथ
दिन भरि रौद मे
बनता नेता

बिसरि जेता
अपन क्षेत्र कए
जीतला बाद

सोमवार, 13 अगस्त 2012

महंगाई आ भर्स्टाचार

ई महंगाई
अछि बड़ विशाल
तोड़त ड़ार

भुक्खे मरब
कोना हेतै गुज़ारा
अखाड़ मास

सभटा नेता
आर इ सरकार
दुनु टा भ्रष्ट

कोन उपाय
करब सरकार
पेटक लेल

वोट दए क
बनाबू सरकार
ईमानदार

तखने अछि
ज़िंदा रहय केर
नीक उपाय

आयल नेता
नीक ईमानदार
भरल पेट



सोमवार, 16 मई 2011

हाइकू/ टंका/ शेनर्यू (चित्र: उत्तर भारत, सौजन्य पिकासो वेब एल्बम)



५ टा हाइकु -:


    (१)
प्रकृति केर
अद्भुत दृश्य ये
गाम घोर में
    (२)
पहाड़ तोर
खेत खलिहान ये
जीवनक डोर
    (३)
माटिक गुण
केकरा से कहब
अपने सोचु
    (४)
हरियर खेत
जीवनदायनी ये
मनुख लेल
   (५)
एही गोद में
हम जनमल छी
एते मरब


५ टा टंका -:


   (१)
विधना केर
अद्भुत रचना ये
एही प्रकृति
एहन लागय ये
रही जाऊ एतय
    (२)
उपजायब
हम एही माटि सों
स्वर्ण सृंखला
किछु अपना लेल
किछु अहाँक लेल
    (३)
झूमी रहल
किसानक मुनवा
मयूर सन
देखलक जब से
हरियर खेत के
   (४)
करू प्रणाम
अपन माटि कए
कोटि ह्रदय
जेकर प्रताप से
जिनगी भेटल ये
   (५)
फैली रहल
हरियर कचोड़
दूर तलक
स्वर्गो के माति दै ये
हिनक रूप रंग

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

हाइकू


करियो कृपा/ करैत छि नमन/ हे छठी माई

साँझक बेर/ सूर्य देव के आगांs/ जोडैत हाथ

दुहि रहल/ पेट भरय लेल/ बकरी केर

दूर नै ये/ बस चारि कदम/ मंजिल लेल

सड़के कात/ बेचीं रहल छैक/ हाथक कला

अपन गीत/ अपन वेश-भूषा/ अपन नाच

नाचि रहल/ ढोल के धुन पर/ छोड़ा आ छौड़ी

फेनिल पानि/ कल कल करता/ देत डूबाई

स्वर्गक सीढ़ी/ बनाउ देलक ये/ विधना लेल

निर्मल पानि/ शांत पड़ल छैक/ ये किछु बात

धरती पर/ उतरी रहल ये/ नभ प्रकृति

मोहक दॢश्य/ प्राकृतिक रचना/ इन्द्रधनुषी

ठूंठ गाछ पे/ अकुलायत चिड़ै/ प्यासल चोंच

हाइकू


नेता

सबटा चोर/ मरय केर बाद/ बनल नेता

गिरगिट सों/ रंग बदलनाय/ सिखलक ये

मुहं में राम/ बगल में छुरी के/ करैत सिद्ध

वोटक लेल/ लगेता दाँव पर/ आँखिक लाज

सात पुश्त भी/ नेहाल भए जेता/ बनिके नेता

निगैल गेल/ सुरसा बनि केर/ सोंसे देश के

नेताक नाम/ सुनैय में लागय/ जेना गारि ये

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

हाइकू


मुखिया -:
चुनाव लेल
पहिरे लागल ये
खादी कुरता

सरपंच-:
बुझायल जों
महिमा चुनाव के
गेल बोराय

पंच-:
दारु,टका सों
ख़रीदे रहल ये
सबटा वोट

वार्ड-सदस्य -:
चुनावी नैया
पार करय लेल
जोड़ैत हाथ

जनता-:
पाँच साल के
निकालैत छिकार
ये बुधियार

हाइकू

दादा -:
नेता बनिके
पहिरे लागल ये
खादी कुरता

दादी-:
पान चबौने
नेने हाथ में लाठी
घूमि रहल

बाबूजी -:
धिया पुता ले
रौद में दिन भरि
खटैत रहे

माय -:
बनि पुतौह
करैत ये चाकरी
अपने घोर


बहिन -:
भेल जवान
बियाहक आस में
गिनैत दिन

भाई -:
लुच्चा बनिके
अंगना दुआर पे
छिछियाबैत

हम -:
देखि सुनि के
परिवारक गाथा
भेलोंउ क्षुब्ध