बुधवार, 4 अप्रैल 2012

हाइकू

कनिया गोर
भदबा झाईं झाईं
बहबै नोर

पियाजी मोर
नौकरी लेल हाय
गेलथि छोड

फागुन भोर
मदमस्त पवन
तोडय कोंढ

चैतीक शोर
विरिहिन करेज
ताकय छोर

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

हाइकू/टनका

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक हाइकू/टनका---


१
लिलसा रहै
उपर बढ़बाक
ने भेलै पूर
संगी धोखा देलकै
मोन मारि लेलक
२
हादसा भेलै
हाकरोस मचलै
फेरसँ शान्ति
लोक मोन मारि क'
जीबैत रहि गेल
३
कोखि बेचैमे
दाम नै देखलक
इच्छा पुरलै
कचोटैत रहल
अपन हालातकेँ
४

सुरुज देव
छठि लेल पूजित
ओना सुरुज
सभ किओ पुजैए
कबुला पुरै लेल
५
चानक सोंझा
अन्हरिया लजैए
चकोर संग
क्रीड़ा करबा लेल
मुदित भ' जाइए
६
महँगाइसँ
जिनगी भेल भारी
चलि अबैए
इ रीति अदौएँसँ
स्वाच्छन नै भेटत
७
जनता प्रति
पूर्णतः आभारी छी
करैमे सेवा
दिवस गुजारै छी
जीतैकेँ गारण्टी नै
८
मजमूनमे
जे खून लेल गेलै
गलत छलै
अवैध संबंधकेँ
कोना सोंझा अनैत
९
दृश्य धूमिल
परदाक पाछूसँ
खेल चलत
सोंझामे पाक-साफ
पाछूमे बूझू साँप
१०
गति दुर्गति
समयक कुचालि
अपन चेष्टा
वैश्वीकरण लेल
स्वंयकेँ तैयारी

11

जीबाक बाट
भ' रहल छै बन्न
तामझामसँ
इ नव शिक्षा लिअ
रहू दौड़मे आगू
१२
महँगाइसँ
लगै छै दाम बेसी
उपभोक्ताकेँ
किसान छै बेहाल
सस्ता समान बेचि
१३
जोगार लगा
अस्तित्व बनबैए
दिखावा बेसी
फूसि बाजि
जिबैए महान भ'
14
दाम बढ़लै
घटलै दरमाहा
भोगैए लोक
घैहरि काटि-काटि
दिवस गमाओल
१५
चान-सुरुज
घर उगै छै बाबा
हँ,ओहिना छै
पाँजि-कुटि क' खाउ
बेटी-पोती सड़ाउ
१६
कोखि पैंचि छै
गुजर चलबैए
कोनो लाज नै
देशक बदनामी
अप्पने जेब भरै
17
नार-पुआर
गरम रखै देह
आब छै कहाँ
गद्दाक भेलै फैसन
प्रकृति नुकाएल
१८
कानि रहल
मौसमकेँ मारिसँ
सभ किसान
बढ़लै कर्ज
हेतै कोन निदान
१९
मिल मालिक
नेताकेँ पोसने छै
करै अवैध
ओकर खाली गाड़ी
चलै सलामी लैत
२०
मैथिलीएमे
गीत नामसँ भेलै
पाइक ढ़ेर
मिथिला बिसरि क'
पाश्चात्य सन भेल

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

हाइकू



राइत दि‍न/ कोनो नै अछि‍ हीन/ नाप-जोखमे।


गुण-दोषसँ/ एक-दोसर बीच/ अबैए फाँट।


दि‍न प्रतीक/ बनि‍ ज्ञानक अछि‍/ भेल महान।


राइत अछि‍/ अज्ञानक प्रतीक/ लोक कहैए।


दि‍नकेँ दुन्‍नी/ राति‍ चौगुन्‍नी सेहो/ लोके कहैए।


नि‍र्णए लि‍अ/ नीक संग अधला/ होइते अछि‍।

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

हाइकू



१) जोतल खेत/ आ नीपल आँगन/ नीक लगैए
२) पानिमे माछ /छह-छह करैए /बंसी हसैए
३) नवका धान/ आ नवकी कनियाँ /अनमोल छै
४) लतरल छै/ लत्ती चारहि पर /तीमन लेल
५) खुना रहल /पोखरि आ इनार/ डुबहे लेल
६) भूत-प्रेत छै /इ देशक जनता /नेता कहैए

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

किछु हाइकू/ टनका/ हैबून

१
लैत ढुइस
कालिदासे लड़ैए
टुड़नीपर
२


माछक घर
सहथ गाँथि आनी
अपना घर
३


समुद्र थल
मिलैए अकासमे
त्रिशंकु भेल


४
प्रकृति ऐना
उधियाइत दृश्य
मोनक ऐना!
५


निचुका ढाला
उपरका चढ़ाइ
दुनू सरल
६
गोड़ाक लीद/ घोड़े सन रंगक/ आ रूपक छै
७
घर हमर/ नारक टाल सन/ उड़िऐत नै
८
आसक अछि/ पनिसोखा उगल/ चलू बढै छी
९
भेल उबेर/ उगल पनिसोखा/ काज करै छी/ बहराइ घरसँ/ बाट भेटल अछि (टनका)
१०
पनिसोखा ई/ उगल अकासमे/ उपरे ऊपर! (शेनर्यू)
११
आह, आब हएत उबेर, उगि गेल अछि पनिसोखा, खुजि गेल अछि बाट, बनिहार बिदा भेल बनिज करए, आ किसान बीया उखारि रोपनि लेल आ हम बिदा भेलौं कोनो अकाजक काज लेल, अन्तहीन बाटपर, सुकाजक काज लेल , दिशाहीन ठमकल चौबटिया दिस।
बाट तकैत
ताकी अकास दिस
विचित्र भ्रम
जेना ई पनिसोखा
उगि खोलत बाट


तखन फेरसँ ताकब, हेरब अपन समान, आ बर्खा होइ धरि चलैत रहब। तँ ई कहब जे बर्खा होइ धरि चलैत रहब कोनो पलायन तँ नै। पनिसोखा उगले अछि, बाट खुजले अछि आ हम बाट ताकि रहल छी आबैबला बर्खाक?
सतरंगिया
अछि ई आस
उगैए आस
डुबबाले अकास
बनि गेल संत्रास
(हैबून -दू टा गद्य आ दूटा टनका युक्त)
१२
सेहन्ता लेने/ ठाढ़ छी मरियो कऽ/ देखबै दिन
१३
कपोत नृत्य /गजदन्त बनल/ छी ठाढ़ सोझाँ
१४
टकराइए / हहारोह करैत/ टूटि जाइए
१५
अमरलत्ती/ गछारने गाछकेँ/ ओकरा मारि/ अपने बनि गेल/ अछि अमरलत्ती
१६
गरजै मेघ/ चमकैए बिजुरी/ प्रकृति नृत्य
१७
बिजुरी देखि/ मोन पड़ैए प्रेम / जे नै भेटल / हिलोरैए मेघ ई/ ह्रिदै भीतरधरि
१८
घिचै छी आस/ बरफपर नाह/ बिन प्रयास/ मोनक उछाही आ/ आसक प्रयासमे
१९
अम्ल बरखा/ नमछुरुक अछि/ देलियन्हि कऽ/ सुड्डाह सेहो बनि/ बनि काल-बरखा
२०
जीवन-बर्खा/ बर्खा दैए जीवन/ अम्लक बर्खा/ छद्मवेशी बनि कऽ / बनल मृत्यु-बर्खा
२१
जरियो गेल/ तैयो अछि ठाढ़ ई/ मुँह दुसैत
२२
सजीव हीन / सृष्टिविहीन लोक/ असगर छी/ कला तैयो मरल?/ नृत्य तैयो रुकल?
२३
मखान पान/ दिन तका भेटैए/ पहिचान जे/ पैकारक हाथमे/ बिका रहल अछि
२४
अहरा अछि/ पिरारक फड़ ई/ गरीबक यौ
२५
रातिक झोंझ/ राति अपने अछि/ कीड़ा आ चिड़ै/ वातावरण अछि/ शान्त आकि भुताह
२६
बौआचौरीमे/ चरि पेट लटकै/ घर घुरु ने/ चरबाहकेँ ताकै/ निकेना तँ अछि ओ
२७
अपरम्पार/ माइक ममताक/ विलक्षणता

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

हाइकू

आधुनिक मैथिली साहित्य केर सभसँ बेसी नैसर्गिक आ प्रतिभावान आ मैथिलीक पहिल जन-कवि आ मैथिलीक भिखारी ठाकुर श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ जीकेँ समर्पित हमर ई किसानी हाइकू।

1) कोदारि लेने / खेतिहर अबैए / खेत हँसैए

2) फूँही पड़ैए / आब खेत-खेतमे /बेंग बजैए

3) आरिक संगे / खूब ढ़ूसि लड़ैए /खेतक पानि

4) बीआ पड़लै /खेत अँकुरा गेलै/ हरखित ओ

5) बसात एने/ सदिखन नचैए/ ओ सीना तानि

6) आएल बाढ़ि / डुबलै सीस धरि / आब की हेतै

7) ओ बेर-बेर / खूब छाती पिटैए / खूब कनैए

8) सरकार तँ /की जुलुम करैए /चुप्पे देखैए

9) खेतिहर तँ / सरकारक संगे /झुट्ठे बैसल

10) गरदनिमे / फाँसी लगा लेलकै /ओ खेतिहर

11) संसद चालू / अटल हो की लालू / हा-हा, ही-ही हू

रविवार, 24 जुलाई 2011

टनका/ हाइकू

टनका
गोरहा ढोल
छी गोबरकढ़नी
गोनौर बनै
वा गोइठाक ढोल
बढ़ैए ऊँच दिस



हाइकू


निचुका ढाला/ उपरका चढ़ाइ/ दुनू सरल


समुद्र थल/ मिलैए अकासमे/ त्रिशंकु भेल


माछक घर/ सहथ गाँथि आनी/ अपना घर


लैत ढुइस/ कालिदासे लड़ैए/ टुड़नीपर


एकपेड़िया/ धंगाइत ढहैत/ बनत रस्ता


खट मधुर/ हरियर आ लाल/ संगे-संग छै